Yogi Adityanath,

इन पुलिसकर्मियों पर अब गिरेगी गाज, योगी सरकार एक्शन मोड में

अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने की तैयारी में सरकार

नई दिल्ली। भ्रष्टाचार (corruption) के मामले में सख्त योगी सरकार (Yogi government) का डंडा अब उन पुलिस अधिकारियों पर प्रदेश में चल रहा है जिनपर किसी भी तरह के आरोप भ्रष्टाचार के हैं। सरकार प्रशासन और पुलिस महकमे में कामकाज में पारदर्शिता लाने के लिए हर कदम उठा रही है।

योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) खुद ऐसे मामले को लेकर सख्त तेवर अख्तियार कर चुके हैं। पूरी सरकार करप्शन पर जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। अब योगी सरकार (Yogi Government) ने प्रदेश भेर में भ्रष्ट पुलिसवालों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने की कार्रवाई शुरू की है। डीजीपी मुख्यालय (DGP Headquarter) ने पुलिस की सभी इकाइयों के प्रमुखों, सभी आईजी रेंज और एडीजी जोन को ऐसे नाकारा पुलिसवालों की सूची भेजने के सूचना प्रेषित किया है। पत्र में 31 मार्च 2020 को 50 वर्ष की आयु पूरी कर चुके पुलिस कर्मियों की स्क्रीनिंग कराए जाने के भी निर्देश दिए गए है।

अनिवार्य सेवानिवृत्ति देगी सरकार

वहीं इस पूरे मामले में सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर रैंक के पुलिसकर्मियों को जो इस तरह के किसी भी प्रकरण में शामिल पाए जाएंगे उनको अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने पर विचार किया जा रहा है साथ ही जो लोग इस महकमे के इस आयुवर्ग में आकर अशक्त हो गए हैं लेकिलगातार अपनी ड्यूटी बजा रहे हैं उन्हें भी सेवानिवृत करने पर विचार किया जा रहा है। योगी सरकार की इस बड़ी कार्रवाई के बाद यूपी पुलिस महकमे में भ्रष्ट पुलिस वालों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है। छंटनी में उन पुलिसवालों पर गाज गिर सकती है जो 31 मार्च 2020 को 50 वर्ष की आयु पार कर चुके हैं।

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इससे पहले मीडिया में यह खबर आई थी कि उत्तर प्रदेश सरकार 50 साल से अधिक आयु वाले कर्मचारियों के कामकाज की समीक्षा करने जा रही है। अपेक्षित प्रदर्शन नहीं करने वाले कर्मचारियों की अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जाएगी। इससे पहले केंद्र सरकार ने भी ऐसे कई अधिकारियों और कर्मचारियों को ‘जबरन सेवानिवृत्त’ कर दिया था। केंद्र सरकार की तरफ से भी ऐसे ही 15 वरिष्ठ आईटी अधिकारियों को ‘जबरन सेवानिवृत्त’ किया गया था।

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ऐसे में जानकारी के मुताबिक, प्रदेश में ऐसे 30 अफसरों को चिह्नित कर लिया गया है, जिन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जाएगी। इसमें 17 समीक्षा अधिकारी, आठ अनुभाग अधिकारी, तीन अनुसचिव और दो उप सचिव शामिल हैं। इन सबके खिलाफ पूर्व में हुई जांचों, कार्रवाई और उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों का ब्योरा जुटाया जा रहा है, ताकि उन्हें सेवा से हटाने के पर्याप्त आधार मौजूद रहे।

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