Workers are hungry due to lack of identity card

कोरोना संकट के बीच पहचान पत्र के अभाव में दाने-दाने को मोहताज मजदूर

अंबिकापुर. केंद्र सरकार और राज्य सरकारें लॉकडाउन को लेकर संजीदा है। वहीं अंबिकापुर में भी इसका असर साफ देखा जा सकता है। इन सब के बीच शहर में कुछ मजदूर तबके के लोग अब पहचान पत्र न होने के अभाव में दाने दाने को मोहताज हो रहे हैं। इन मजदूरों को शासन की योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है क्योंकि ये बाहर से आकर यहां रह रहे हैं।

अंबिकापुर शहर में दूसरे राज्य या दूसरे जिलों के रहने वाले कामगारों व मजदूरो को इस लॉक डाउन में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। भले ही सरकार हर गरीब को राशन देने की बात कह रही हो लेकिन इन इन मजदूरों तक इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसकी वजह है कि जिला प्रशासन नगर निगम के द्वारा दिए जा रहे राशन को आधार कार्ड ,वोटर आईडी के या किसी पहचान पत्र के बाद ही आपको राशन देने पात्रता होती है। हालांकि कुछ दिन पहले सामाजिक कार्यकर्ताओं की ओर से इन्हें राशन मुहैया कराई गई थी लेकिन राज्य सरकार के निर्देश के बाद यह भी लोगों की मदद नहीं कर पा रहे हैं। सुनीता विश्वकर्मा, दीपिका कुजूर और अर्जुन तिर्कि के मुताबिक आज उनकी स्थति ये नहीं कि वे अपना पेट भर पाएं।

इधर इस मामले में नगर निगम के महापौर अजय तिर्की का कहना है कि ऐसे मजदूरों को इस दौरान परेशानी तो हुई है और इसी बात का खयाल रखते हुए हमने निगम पार्षदों से कामगार मजदूरों की लिस्ट तैयार करने के लिए कहा है। ऐसे लोगों को 50 पैकेट राशन पहुंचाए भी जा चुके हैं। दूसरी ओर राशन बांटने वाले कर्मी के मुताबिक जिनके पास पहचना पत्र नहीं उन्हें शासन की नियमों के मुताबिक राशन हीं दिया जा सका है।

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