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Work in lockdown: भूपेश सरकार के निर्देश का राजधानी में उल्लंघन

प्रिटिंग प्रेस में काम कर रहे डेढ़ हजार मजदूर 

रायपुर। Work in lockdown: कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए देश भर में लॉकडाउन चल रहा है। प्रदेश की सभी फैक्ट्रियां भी बंद हैं। दूसरी ओर पाठ्य पुस्तक निगम ने जिन 25 प्रिंटर्स को किताबें छापने की अनुमति दी है। उन सबके प्रिंटिंग प्रेस बिना किसी बाध्यता के चल रहे हैं। अहम बात यह है कि इन सभी प्रिंटिंग प्रेस में 50 से ज्यादा मजदूर काम कर रहे हैं।

इसकी पड़ताल करने न्यूज स्लॉट्स की टीम गोंदवारा, रिलायंस पेट्रोलपंप के पीछे वीके ऑफसेट प्रिंटिंग प्रेस पहुंची। प्रिंटिंग प्रेस में किताब छापने का काम चल रहा था। संचालक द्वारा गेट बंद करके पूरा काम करवाया जा रहा था। प्रिंटिंग प्रेस के अंदर 40 मजदूर थे। न्यूज स्लॉट्स की टीम को देखते ही संचालक ने मशीन बंद करवा दी। प्रिंटिंग प्रेस के संचालक अभय ने चर्चा में बताया, कि उन्हें पापुनि से प्रिंटिंग करने की अनुमित मिली है। जबकि प्रदेश में लॉकडाउन लगा है। ऐसी स्थिति में फैक्ट्री संचालन करने वाले पर धारा 188 के तहत एफआईआर दर्ज करने का निर्देश है।

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25 प्रिंटर्स का नाम दिया पापुनि ने

पाठ्य पुस्तक निगम ने 1 अप्रैल को कलेक्टर को पत्र लिखकर प्रिटिंग प्रेस चलाने की अनुमति मांगी थी। जिसमें 25 प्रिंटर्स का नाम भी दिया गया था। पापुनि की इस लापरवाही से संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है। बतादें, कि एक-एक प्रिटर्स के प्रेस में तकरीबन 50 कर्मचारी काम (Work in lockdown) कर रहे हैं। इस संस्थानों में सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था भी नहीं है। इस तरह तकरीबन 1500 कर्मचारियों का जीवन खतरे में पड़ा हुआ है।

एज फार रूल की अनुमति

जो पत्र पापुनि ने कलेक्टर को पत्र लिखा है,उस पर अपर कलेक्टर ने एज फार रूल अनुमति देने की बात कही है। जबकि वर्तमान में आपदा अधिनियम लागू है। ऐसे में किसी भी फर्म में 50 श्रमिकों को एक साथ काम (Work in lockdown) करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

सिर्फ कृषि से जुड़े संस्थानों को छूट

केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश के बाद कलेक्टर ने सिर्फ खाद्यान्न और कृषि से जुड़ी फर्मों के संचालन की अनुमति दी है। इसके बाद भी पापुनि से संबधता रखने वाले प्रिंटर्स को प्रिटिंग को कैसे अनुमति मिल गई है संदेह का विषय है।

किताब उपलब्ध नहीं होना बताया कारण

पापुनि के एमडी ने जो पत्र कलेक्टर को लिखा है उनमें अगले शिक्षण सत्र में समय पर किताबें उपलब्ध नहीं होने पाने का कारण बताते हुए अनुमति मांगी है। जबकि वर्तमान में स्कूलें कब से संचालित होंगे? कब किताबें वितरित होंगी? इस संबंध में अब तक शासन से कोई सूचना नहीं मिली है।

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मामलें में रायपुर के एडीएम विनीत नंदनवार का कहना है, कि नियमानुसार प्रिटिंग कराने के लिए पाठ्य पुस्तक निगम को अनुमित दी गई थी। नियम विरूद्ध प्रिटिंग प्रेस में काम (Work in lockdown) हो रहा है, तो जांच कराई जाएगी। 

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