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21 अप्रेल के बाद समीक्षा फिर होगा Lockdown हटाने पर विचार: भूपेश बघेल

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल: विडियो संदेश के हाईलाईट

  • ऐसे जरूरतमंद जिनके पास किसी कारण से राशन कार्ड नहीं उन्हें भी एक माह का निशुल्क राशन दिया जाएगा।
  • मुख्यमंत्री ने कोरोना संक्रमण की रोकथाम में प्रदेशवासियों के संयम, आत्मविश्वास, सहयोग और जागरूकता को सराहा
  • नियमित रूप से मास्क पहनने, हाथ धोते रहने और फिजिकल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखने की अपील
  • सबके संयम, अनुशासन और आत्मबल के सहारे ही इस महामारी को करेंगे परास्त

रायपुर. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (Bhupesh Baghel) ने आज जनता के नाम अपने संदेश में कहा है कि कोरोना वायरस (coronavirus) की रोकथाम के लिए लागू लॉकडाउन छत्तीसगढ़ में अभी जारी रहेगा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि 21 अप्रैल को कोरोना वायरस संक्रमण की स्थिति की समीक्षा के बाद ही हालातों के मद्देनजर कोई उचित फैसला लिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि जिन जिलों में कोरोना वायरस संक्रमण पर नियंत्रण होगा उन्हें गाइडलाइंस के मुताबिक छूट प्रदान की जायेगी। इसके लिये यह आवश्यक हैं कि हम अपने अपने जिलों में लॉकडाउन का कड़ाई से पालन करें। हम सभी नियमित रूप से मास्क पहने, हाथ धोते रहे और फिजिकल डिस्टेंसिंग पर विशेष ध्यान दें।

नियंत्रण तय करेगा लॉक डाउन के हालात

मुख्यमंत्री ने कहा कि लॉक डाउन के प्रथम चरण में सभी ने जो संयम, आत्मविश्वास और जागरूकता दिखायी है उन सबके लिए मैं आभार व्यक्त करता हूं। जितनी जल्दी आपका शहर, आपका जिला कोरोना वायरस के संक्रमण को नियंत्रण में रखेगा उतनी जल्दी आपको लॉक डाउन में छूट देने पर विचार किया जाएगा।

जिनके राशन कार्ड नहीं उन्हें भी एक महीने का राशन

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि राज्य में 56 लाख राशन कार्डधारियों को निःशुल्क राशन देने का फैसला किया गया। इनमें से लगभग सभी लोगों को लगभग दो माह का राशन निःशुल्क प्रदान किया गया है। नये राशन कार्ड बनाने का कार्य भी युद्धस्तर पर चल रहा है। वहीं जिनके पास वर्तमान में राशनकार्ड नहीं हैं, उन्हें भी एक माह का राशन निःशुल्क प्रदान किया जायेगा।

दूसरे राज्यों में फंसे मजदूरों का भी जिक्र

मुख्यमंत्री ने दूसरे राज्यों में फंसे मजदूरो का भी जिक्र किया और कहा कि वहां की सरकारों से हमारी लगातार चर्चा हो रही है। सभी के रहने, भोजन और आवास के सभी प्रबंध किए जा रहे हैं। श्रमिकों की सहायता के लिए हेल्पलाइन की व्यवस्था की गई है और नोडल अधिकारी भी नियुक्त किए गए हैं, जो लगातार ऐसे लोगों की मदद के लिए संबंधित राज्य सरकारों के सम्पर्क में हैं।

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