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ब्रेकिंग: चालू सीजन वनोपज संग्रहण करने में छत्तीसगढ़ देश में अव्वल, सालाना टारगेट पूरा किया मात्र 6 माह में

अब तक 104 करोड़ के डेढ़ लाख क्विंटल लघु वनोपजों का संग्रहण

रायपुर. वनोपज संग्रहण (vanopaj sangrahan) करने के मामलें में छत्तीसगढ़ ने नेशनल स्तर में रिकार्ड कायम किया है। विभागीय अधिकारियों की माने तो राज्य में 104 करोड़ के डेढ़ लाख क्विंटल लघु वनोपजों का संग्रहण किया जा चुका है। चालू सीजन में सीएम भूपेश बघेल और वनमंत्री मोहम्मद अकबर के निर्देश पर विभागीय अधिकारियों ने कीर्तिमान बनाया है, जिससे प्रदेश देश भर में पहले नंबर पर आया है।

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वनोपजों की संख्या हुई 31

वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने बताया कि वर्तमान में राज्य सरकार द्वारा वनवासी ग्रामीणों के हित को ध्यान में रखते हुए खरीदी जाने वाली लघु वनोपजों (vanopaj sangrahan) की संख्या बढ़ाकर अब 31 तक कर दी गई है। इसके पहले प्रदेश में वर्ष 2015 से 2018 तक मात्र सात वनोपजों की समर्थन मूल्य पर खरीदी की जा रही थी।

इस संबंध में प्रधान मुख्य वन संरक्षक राकेश चतुर्वेदी ने बताया कि राज्य में चालू वर्ष में न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना के अंतर्गत संग्रहित लघु वनोपजों में इमली (बीज सहित), पुवाड़ (चरोटा), महुआ फूल (सूखा), बहेड़ा, हर्रा, कालमेघ, धवई फूल (सूखा), नागरमोथा, इमली फूल, करंज बीज तथा शहद शामिल हैं।

इसके अलावा बेल गुदा, आंवला (बीज रहित), रंगीनी लाख, कुसुमी लाख, फुल झाडु, चिरौंजी गुठली, कुल्लू गोंद, महुआ बीज, कौंच बीज, जामुन बीज (सूखा), बायबडिंग, साल बीज, गिलोय तथा भेलवा लघु वनोपजें भी इसमें शामिल हैं। साथ ही हाल ही में वन तुलसी बीज, वन जीरा बीज, ईमली बीज, बहेड़ा कचरिया, हर्रा कचरिया तथा नीम बीज को भी शामिल किया गया है।

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स्व सहायता समूह के माध्यम से वनोपजों का क्रय

छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ (vanopaj sangrahan) के प्रबंध संचालक संजय शुक्ला ने बताया कि राज्य में 3 हजार 500 ग्रामों तथा 866 हाट बाजारों में महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से लघु वनोपजों के समर्थन मूल्य पर क्रय करने की व्यवस्था की गई है। इसी तरह राज्य में लघु वनोपजों के प्राथमिक प्रसंस्करण कार्य के लिए 139 वन धन केन्द्र स्थापित किए गए हैं।

राज्य में चालू सीजन के दौरान अब तक लघु वनोपजों में 61 करोड़ रूपए की राशि के 3 लाख 4 हजार 242 क्विंटल साल बीज तथा 20 करोड़ रूपए की राशि के 63 हजार 676 क्विंटल ईमली (बीज सहित) का संग्रहण हो चुका है। इसी तरह 8 करोड़ रूपए की राशि के 28 हजार 158 क्विंटल महुआ फूल (सूखा), 87 लाख रूपए की राशि के 5 हजार 107 क्विंटल बहेड़ा, 70 लाख रूपए की राशि के 5 हजार क्विंटल पुवाड (चरोटा) का संग्रहण किया गया है।

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