बिकने जा रहा ये सरकारी बैंक, सरकार ने बता दिया अपना प्लान!

पब्लिक सेक्टर के बैंक आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) का विनिवेश अगले वित्त वर्ष (FY 2023-24) में पूरा हो जाएगा. डिपार्टमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट के सचिव तुहिन कांता पांडे ने न्यूज एजेंसी रायटर्स को बताया कि IDBI Bank में बहुमत हिस्सेदारी हासिल करने के लिए घरेलू और विदेशी दोनों निवेशकों ने रुचि दिखाई है. सरकार ने कहा कि उसे IDBI बैंक में बहुमत हिस्सेदारी के लिए कई बोलियां प्राप्त हुई हैं. आने वाले वित्त वर्ष में IDBI Bank के विनिवेश की उम्मीद है.

कितनी है हिस्सेदारी?

सरकार और जीवन बीमा निगम (LIC) दोनों के पास आईडीबीआई बैंक में 94.71 फीसदी की हिस्सेदारी है. इसमें केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 45.48 फीसदी है, तो वहीं एलआईसी का हिस्सा 49.24 फीसदी है. सरकार ने 7 अक्टूबर को आईडीबीआई बैंक के एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट के लिए बोलियां आमंत्रित की थीं. कुल मिलाकर सरकार और जीवन बीमा निगम (LIC) मिलकर आईडीबीआई बैंक में 60.72 फीसदी की हिस्सेदारी बेचेंगे.

कब तक हो पाएगा विनिवेश

तुहिन कांत पांडे ने एक इंटरव्यू में कहा, ‘हमें अगले वित्त वर्ष की पहली छमाही तक आईडीबीआई बैंक की बिक्री पूरी होने की उम्मीद है.’ उन्होंने कहा कि बिडर्स को भारतीय रिजर्व बैंक के “उपयुक्त और उचित मानदंड” के लिए पुनरीक्षित किया जाएगा और फिर बैंक के गोपनीय डेटा को संभावित बोलीदाताओं के साथ साझा किया जाएगा. सफल बिडर्स को पब्लित शेयरहोल्डिंग के लिए 5.28 फीसदी के अधिग्रहण के लिए ओपन ऑफर लाना होगा.

खरीदारों के लिए नियम

इससे पहले डिपार्टमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट ने कहा था कि संभावित खरीदारों के पास 22,500 करोड़ रुपये की न्यूनतम नेटवर्थ होनी चाहिए. इसके अलावा एक कंसोर्टियम में अधिकतम चार सदस्यों की अनुमति होगी. साथ ही सफल बिडर्स को अधिग्रहण की तारीख से पांच साल के लिए इक्विटी पूंजी का कम से कम 40 फीसदी अनिवार्य रूप से लॉक करना होगा. सरकार ने कुछ समय पहले कहा था कि विदेशी फंड और निवेश फर्मों के एक कंसोर्टियम को आईडीबीआई बैंक के 51 फीसदी से अधिक की ओनरशिप की हासिल करने की अनुमति दी जाएगी.

कोरोना के कारण अटका मामला

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) ने फरवरी 2021 में बजट पेश करते हुए IDBI बैंक के अलावा दो और सरकारी बैंकों के निजीकरण का ऐलान किया था. लेकिन कोरोना संकट की वजह से मामला अटक गया था. सरकार ने चालू फाइनेंशियल ईयर के लिए 65 हजार करोड़ रुपये के विनिवेश का टारगेट सेट किया था.

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