चहेती फार्म को टेंडर दिलाने वित्त विभाग के एमडी ने किया गोलमाल, नोटिस जारी पर कार्यवाही नहीं

रायपुर । सीजीएमएससी के वित्त विभाग के द्वारा चहेती फर्म को लाभ दिलाने के लिए दूसरी फर्म को अपात्र कर दिया गया। मामले में वित्त विभाग के एमडी मीनाक्षी गौतम को सितंबर माह में नोटिस भी जारी किया गया फिर मामला ठंडे बस्ते में डालकर अधिकारी को बचाया गया। उनके द्वारा बड़ी लापरवाही की गई थी। जिस पर 07 दिनों के भीतर लिखित में स्पष्टीकरण मांगा गया था। महिला अधिकारी के विरूद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्यवाही करने की चेतावनी दी थी लेकिन मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। अब मामले की शिकायत राज्यपाल और स्वास्थ्य मंत्री से करने की तैयारी की जा रही है।

यह है मामला

कवर ए का वित्तीय मूल्यांकन वित्त शाखा द्वारा किया गया है। वित्तीय मूल्यांकन शीट में फर्म मेसर्स देशरक्षक औषधालय लिमिटेड एवं मेसर्स हिमालया ड्रग्स एण्ड रिसर्च लैबोरेट्रीज के जीएसटी रिटर्न की
जाँच कर दोनों फर्म को जीएसटी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट एवं जीएसटी रिटर्न के तहत वित्त शाखा द्वारा पात्र किया गया। इस कथन के साथ द्वारा वित्तीय मूल्यांकन शीट भी संलग्न की गई।
उक्त वित्तीय मूल्यांकन शीट की जांच किया गया, जिससे यह साफ है कि एक ही फर्म मेसर्स हिमालया ड्रग्स एण्ड रिसर्च लैबोरेट्रीज को ही पात्र किया गया है। एमडी फाइनेंस के द्वारा वित्तीय मूल्यांकन शीट
में फर्म मेसर्स देशरक्षक औषधालय लिमिटेड के सामने रिमार्क कॉलम में “GSTR-3B GSTR-3B रिटर्न फ़ाइल केवल 19 मार्च को संलग्न” था, जबकि मेसर्स हिमालया ड्रग्स एण्ड रिसर्च लैबोरेट्रीज के सामने दस्तावेजों की कमी होने का कोई भी उल्लेख नहीं था, जिसके कारण निविदा समिति के सामने पूरे तथ्य नहीं होने की वजह से उनके द्वारा मेसर्स हिमालया ड्रग्स एण्ड रिसर्च लैबोरेट्रीज को पात्र घोषित किया गया। दोनों फर्मों में एक जैसी कमी होने पर भी अलग-अलग व्यवहार किया गया और चहेती फार्म को लाभ पहुंचाने के लिए दोहरा मापदंड अपनाया गया।

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