मुसीबत में बन गईं भाई तो कभी बहन की तरह साझा किया दुख

रायपुर. Rakshabandhan special story : रक्षाबंधन परंपरा अनुसार भाई-बहन के प्रेम और स्नेह का प्रतीक है लेकिन कभी-कभी दोस्ती भी इस रिश्ते को निभा जाती है। कठिन हालातों में जरूरत पड़ी तो एक भाई की तरह साथ खड़े हो गए तो कभी मौका आया तो बहन बनकर सुख-दुःख साझा कर लिया।

हम बात कर रहे हैं सगी बहनों की तरह दोस्ती की डोर थामी चार सहेलियों की जो बीते 5 दशक से एक दूसरे के साथ हैं। इनमें शामिल हैं-अफरोज, लता, अरुणा और सुमन।

करीब 57 साल पहले यह कहानी उस वक़्त शुरू हुई जब बलौदाबाजार महज एक छोटा सा गाँव नुमा कस्बा हुआ करता था, यहाँ बचपन मे एक दूसरे से मिलने वाली इन चार लड़कियों को शायद खुद भी अंदाजा नहीं था कि उनका रिश्ता सगी बहनों से बढ़कर भी हो जाएगा।

बिना किसी स्वार्थ और लाग-लपेट एक दूसरे के लिए समर्पित इन चारों को पहली बार देख आज भी यकीं करना मुश्किल हो जाता है कि ये आपस मे बहने हैं या जिगरी दोस्त।

कहते हैं ऐसा रिश्ता किस्मत वालों को मिलता है,आज जिस तरह से ये आपस में जुड़ी हैं वो एक मिसाल है। बस यह रिश्ता यूहीं बना रहे, इसे किसी की नजर ना लगे।

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