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राफेल डील में ऑफसेट से जुड़ी नीतियों का पालन नहीं: CAG

कैग ने केंद्र सरकार की आलोचना की

दिल्ली. राफेल डील में ऑफसेट से जुड़ी नीतियों का पालन नहीं होने पर नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (CAG) ने रक्षा मंत्रालय की आलोचना की है।

पॉलिसी के तहत सरकार ने फ्रांस की एविएशन कंपनी दसॉ एविएशन से 36 राफेल विमानों के लिए डील की है। शीर्ष ऑडिटर कैग (CAG) ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि इस फ्रेंच फर्म ने अभी तक डीआरडीओ (डिफेंस रिसर्च और डेवलपमेंट ऑर्गनाइज़ेशन) के प्रति अपने ऑफसेट शर्तों को पूरा नहीं किया है। डील की शर्त के अनुसार जिस कंपनीक  साथ डील हुई है, उसे कीमत का कुछ हिस्सा भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की तरह आना चाहिए, जिसमें एडवांस कंपोनेंट्स की स्थानीय तौर पर मैन्यूफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, या फिर नौकरियां पैदा करने की जिम्मेदारियां शामिल हैं।

तकनीकी सहायत नहीं दी

कैग (CAG) की रिपोर्ट में कहा गया है, कि डीआरडीओ को हल्के लड़ाकू विमान  (कावेरी)  के लिए इंजन को देश में ही विकसित करने लिए उनसे तकनीकी सहायता चाहिए थी, लेकिन आज की तारीख तक वेंडर ने इस टेक्नोलॉजी को ट्रांसफर करने को लेकर कुछ स्पष्ट नहीं किया है। कैग के जिम्मेदारों ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, रक्षा मंत्रालय को इस नीति और इसके क्रियान्वन की समीक्षा करने की जरूरत है।  विदेशी आपूर्तिकर्ताओं के साथ-साथ भारतीय उद्योगों की ओर से ऑफसेट का लाभ उठाने में आने वाली समस्याओं की पहचान करने और उनके समाधान करने की आवश्यकता है।

58 हजार करोड़ की डील

भारत ने फ्रांस की कंपनी से 36 राफेल विमान खरीदने की डील की है। यसह डील 58 हजार करोड़ में हुई है। डील के समय दसॉ एविएशन ने कहा था, कि वो वक्त के साथ अपने ऑफसेट दायित्वों को पूरा कर लेगी, लेकिन कोरोनावायरस संकट के चलते यह प्रक्रिया धीमी पड़ गई है। 36 राफेल विमान में से 5 राफेल विमान भारत आ चुके हैं। इन विमानों को रक्षा मंत्रालय ने भारतीय एयरफोर्स के बेडे में शामिल कर लिया है।

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