neha karva with central minister

घरों में पोछा करने वाली उस मां को दुर्ग की बेटी ने कैसे दिया इतना बड़ा तोहफा

रायपुर . टैलेंट सुविधाओं का मोहताज नहीं होता, बल्कि खुद किश्मत उसे बुलंदियों पर पहुंचाने के लिए इंतजाम करती है। ऐसा ही भिलाई की बेटी नेहा कारवा के साथ हुआ है। यह वही बेटी ने जिसने पटना में आयोजित 70वीं राष्ट्रीय जूनियर बास्केटबॉल प्रतियोगिता में न सिर्फ छत्तीसगढ़ को सिलवर मेडल दिलाया, बल्कि खुद के लिए प्रतियोगिता की सर्वश्रेष्ठ महिला खिलाड़ी का खिताब भी जीता। नेहा की सफलता की यह कहानी के लिए कुछ साल पीछे फ्लैशबैक में चलते हैं।
बात कुछ साल पुरानी है। नेहा की मां सूरजो बास्केटबॉल के कोच सरजीत चक्रवर्ती के घर झाडू-पोंछे का काम करती थी। एक दिन बेटी नेहा उनके साथ कोच के घर पहुंच गई। मां घर के कामों में व्यस्त थी, लेकिन बेटी की नजर वहां पर रखे बास्केटबॉल पर पड़ी और उसने बॉल के साथ ड्रिबलिंग शुरू कर दी।

प्रतियोगिता के लिए नहीं थे जूते

प्रतियोगिता के पूर्व नेहा के पास जूते के लिए भी पैसे नही हो रहे थे तब कोच ने उसे मदद की और जूते दिलवाए। आज नेहा ने अपने गुरु सरजीत चक्रवर्ती को गुरु दक्षिणा के रूप में सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बनकर अदा की। कोच ने छत्तीसगढ़ बालिका टीम की इस उपलब्धि को अपने गुरु स्वर्गीय राजेश पटेल को सच्ची श्रद्धांजलि स्वरूप भेंट किया।

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