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शेर और शावक की मौत का कारण फाइलों में कैद

जंगल सफारी प्रबंधन को बरेली संस्था से मिली रिपोर्ट
मौत का कारण जानने विशेषज्ञों की राय ले रहे वन अधिकारी

रायपुर। नवा रायपुर स्थित जंगल सफारी के शेर निर्भय और शावक गुमा की मौत किस वजह से हुई? यह बात तीन माह बाद भी जंगल सफारी प्रबंधन के जिम्मेदार नहीं जान पाए है। शेर और शावक की मौत का कारण जानने के लिए सफारी प्रबंधन ने उनका बिसरा भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान बरेली भेजा था। मार्च माह के पहले हफ्ते में रिपोर्ट बरेली से आ चुकी है। रिपोर्ट आने के बाद भी शेर और शावक की मौत का कारण बताने में सफारी प्रबंधन असमर्थ साबित हो रहा है। मामलें में सफारी प्रबंधन की डिप्टी डायरेक्टर एम. मर्सीबेला का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद विशेषज्ञों की सलाह बीमारी समझने के लिए ली जा रही है। विशेषज्ञ से राय आने के बाद शेर और शावक की मौत का कारण सार्वजनिक कर दिया जाएगा।

दिसंबर में हुई थी मौत

जंगल सफारी के शावक गुमा की मौत १० दिसंबर २०१९ को और शेर निर्भय की मौत १७ दिसंबर को हुई थी। शेरों की मौत के बाद के वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने जंगल सफारी प्रबंधन को पूरे मामलें में रिपोर्ट बनाकर सबमिट करने और मौत का कारण जानने के लिए बिसरा भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान बरेली भेजने का निर्देश जारी किया था। बिसरा बरेली भेजने के बाद वन अफसरों ने १५ दिन के अंदर शेर और शावक की मौत का कारण बताने का दावा किया था। आज घटना को तीन माह हो गए, लेकिन सफारी प्रबंधन अब तक दोनो की मौत का कारण नहीं बता पा रहा है।

पीएम में लेटलतीफी पर उठे सवाल

शेर निर्भय की मौत के बाद उसका पोस्टमार्टम (पीएम) समय पर नहीं करवाने से वन अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर विशेषज्ञ और पशु-पक्षी प्रेमियों ने सवाल खड़ा किया है। उनका कहना है कि शेर का पोस्टमार्टम 24 घंटे के अंदर हो जाता, तो उसकी मौत का कारण पता चल जाता। यदि मौत इंफेक्शन से हुई है, तो शव का पीएम लेट होने से अन्य जीवों में भी संक्रमण फैलने का खतरा हो सकता है। शावक और शेर की मौत के बाद जंगल सफारी में मौजूद सभी वन्य प्राणियों का ब्लड सैंपल सफारी प्रबंधन ने चिकित्सकों की मदद से लिया था। ब्लड सैंपल की जांच में वन अफसरों को वन्य प्राणियों में किसी भी तरह का संक्रमण नहीं मिला था।

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