सरसों की खेती ने चंबल में चमकाया शहद का कारोबार

शहद उत्पादन करने वाले किसानों की कहानी

मुरैना। किसान आंदोलन के बीच देश-प्रदेश में खेती के माध्यम से सफलता की कई कहानियां लिखी जा रही हैं। ऐसी ही कहानी चंबल के मुरैना जिले में शहद (Honey) उत्पादन करने वाले किसानों की है। यहां की जमीन मिठास के इस कारोबार के लिए जन्नात से कम नहीं, यही कारण है कि यहां राजस्थान, उत्तरप्रदेश और बिहार तक के किसान मधुमक्‍खी पालन कर शहद उत्पादन के लिए आते हैं। इसका बड़ा कारण यहां बहुतायत में होने वाली सरसों की खेती है। सरसों के फूलों से मधुमक्‍खी हर साल 28-30 करोड़ रुपये का शहद बनाकर किसानों को आर्थिक सेहत बना रही हैं।

मध्यप्रदेश में मुरैना शहद उत्पादन का गढ़ बना चुका है। कृषि वैज्ञानिक संदीप तोमर बताते हैं कि दो माह से ज्यादा समय तक खिलने वाले सरसों के फूलों से पराग लेकर मधुमक्‍खी 28 से 30 हजार टन शहद (Honey) का उत्पादन करती हैं, जिसका बाजार मूल्य करीब 30 करोड़ रुपये होता है। इस साल मुरैना जिले में सरसों की खेती 1 लाख 52 हजार 656 हेक्टेयर में हो रही है, जो पिछले साल की तुलना में 1100 हेक्टेयर ज्यादा है।

10 किसान से शुरू हुए आज 5000 से ज्यादा जुड़े

मुरैना कृषि विज्ञान केंद्र ने साल 2007-08 में खेतों के आसपास मधुमक्‍खी पालन के बॉक्स लगाकर शहद उत्पादन शुरू करवाया। तब मात्र 10 किसान इससे जुड़े थे। इसके बाद कारवां बढ़ता चला गया। वर्तमान में 5000 से ज्यादा किसान 62 से 65 हजार बॉक्सों से मधुमक्‍खी पालन कर रहे हैं। इनमें राजस्थान, यूपी से लेकर बिहार व पंजाब तक के किसान शामिल हैं, जो हर साल सरसों की फसल के सीजन में शहद उत्पादन के लिए मुरैना में आते हैं।

एफपीओ से विदेशों तक पहुंचेगी ये मिठास

बाजार में शहद (Honey) के दाम 350 रुपये किलो तक हैं, लेकिन किसानों का शहद 80 से 100 रुपये किलो में बिकता है क्योंकि शहद को खपाने के लिए कोई बाजार या व्यवस्था नहीं थी, लेकिन केंद्र सरकार ने मुरैना में फार्मर प्रॉड्यूशर ऑर्गनाइजेशन (एफपीओ) लागू कर इस कमी को दूर कर दिया है। बीते माह ही क्षेत्रीय सांसद व कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने मुरैना सहित देश में कुल पांच एफपीओ स्वीकृत किए थे। जिसके बाद गुणवत्ता वाला शहद सरकारी एजेंसी खरीदेगी।

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