Leaving Maoism the way to live a good life, 8 lakh Naxalites surrendered

माओवाद का रास्ता छोड़ अच्छा जीवन जीने ईनामी नक्सली ने किया आत्मसमर्पण

दंतेवाड़ा . प्रदेश में आतंक मचाने वाले माओवादियों की (Naxalites surrendered) एक बार फिर तगड़ी हार हुई है। इस बार उनके ही साथ ने माओ का रास्ता छोडक़र सादगी से जीना स्वीकार किया है। मामला आठ लाख के इनामी नक्सली के आत्मसमर्पण से जुड़ा है। माओवादियों के प्लाटून 024 के डिप्टी कमाण्डर प्रदीप उर्फ भीमा कुंजाम ने गुरुवार को आत्मसमर्पण कर दिया है। इस अच्छे काम के लिए उसे दस हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि भी दी गई है।

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अब वह सरकार की पुर्नवास योजना (Naxalites surrendered) में शामिल होकर अच्छी जिंदगी बिताएगा। भीमा कुंजाम अभी 25 साल का नवजवान है, जिसके सामने पूरी जिंदगी पड़ी है। भीमा ने पुलिस अधीक्षक दन्तेवाड़ा डॉ. अभिषेक पल्लव (आईपीएस), उप पुलिस महानिरीक्षक सीआरपीएफ डीएन लाल के समक्ष आत्मसर्मपण किया। आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित करने में दन्तेवाड़ा एएसपी राजेन्द्र जयसवाल, किरन्दुल एसडीओपी देवांश राठौर, अरनपुर थाना प्रभारी पुरुषोत्तम धु्रव और सीआरपीएफ कैम्प पालनार, कोंडापारा के सहायक सेनानी रणधीर प्रताप और विनय कुमार सिंह का योगदान रहा।

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बता दें कि भीमा (Naxalites surrendered) वही है, जिसने 2011 में थाना किरन्दुल क्षेत्रांतर्गत पटेलपारा किरन्दुल मार्ग से पेट्रोलिंग पर निकली पुलिस पार्टी पर बम विस्फोट किया था। जिसमें एक निरीक्षक डीएन नागवंशी सहित 3 आरक्षक शहीद हो गए थे। इस तरह कई घटनाओं में लिप्त रहा है।

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