I'm taking your bicycle, forgive me if possible

मैं आपकी साइकिल लेकर जा रहा हूं, हो सके तो मुझे माफ कर देना

रायपुर . मजदूर और उसकी मजबूरी का ऐसा मामला सामने (Labour’s letter) आया है जो आपको झकझोर का रख देगा। आपकी इंसानियत कहेगी कि हे, भगवान अब तो सब पर रहम कर दे। प्रवासी मजदूर इन दिन जैसे तैसे अपने घर पहुंचने की जद्दोजहद लगा रहे हैं। पैदल चलकर 600-1200 किलो मीटर का सफर तय कर रहे हैं। (Labour’s letter) छोटे-छोटे मासूम बच्चे नंगे पैर भरी धूप में रेंगे जा रहे हैं। इनकी हालत देखकर आपकी रूह कांप जाएगी।

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प्रधानमंत्री का आत्मनिर्भर भारत असर मायने में यहां दिखाई देगा। अपने परिवार के लिए हजारों पैदल कदम हौसले से भी रूबरू कराएंगे। सिर के ऊपर से उडक़र निकलता हवाई जहाज और दूसरी ओर इनकी मजबूरी इंसानियत और सरकारी मंशा समझाएगी। (Labour’s letter) इसी बीच आपको ये कहानी भी जाननी चाहिए। कैसे एक मजबूर मजदूर ने अपने दिव्यांग बच्चे के लिए चोरी का अंजाम दिया। इस मजदूर ने एक साइकिल सिर्फ इसलिए चोरी की ताकि वह अपने दिव्यांग बच्चे को घर लेकर जा सके. मजदूर ने साइकिल चोरी करने की जगह पर एक छोडक़र इसके लिए माफी भी मांगी।

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मजदूर ने एक पर्ची पर लिखा, ‘ नमस्ते जी…। मैं आपकी साइकिल लेकर जा रहा हूं। मेरे पास और कोई रास्ता भी नहीं है। बच्चा दिव्यांग है, वह चल नहीं सकता। इसलिए मजबूरी में आपकी साइकिल ले जा रहा हूं। मुझे माफ कर दीजिएगा।

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