eye disease,

नेत्रदान को लेकर चिकित्सक जागरूकता फैलाए: नागरकर

एम्स में नेत्रदान पखवाड़े का वेबीनार के साथ समापन

रायपुर. नेत्रदान को लेकर आम लोगों में जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, रायपुर के नेत्ररोग (eye disease) विभाग के तत्वावधान में 25 अगस्त से आठ सितंबर तक नेत्रदान पखवाड़ा आयोजित किया गया। इसका समापन मंगलवार को एक वेबीनार के साथ हुआ जिसमें कॉर्निया की वजह से अंधता का शिकार बने रोगियों के लिए अधिक से अधिक नेत्रदान करने का आह्वान किया गया।

विधिक अनुमति लेने की चल रही प्रक्रिया

निदेशक प्रो. (डॉ.) नितिन एम. नागरकर ने वेबीनार का उद्घाटन करते हुए कहा कि एम्स, रायपुर नेत्र बैंक की स्थापना के लिए प्रयासरत है और इसके लिए आवश्यक सभी मशीनें खरीदने और विधिक अनुमति लेने की प्रक्रिया चल रही है। अगले कुछ माह के अंदर एम्स में नेत्र बैंक प्रारंभ होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक लोगों को नेत्रदान के लिए जागरूक बनाने की आवश्यकता है जिसमें चिकित्सक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

1.20 लाख रोगियों को कार्निया की आवश्यकता

मुख्य अतिथि वरिष्ठ नेत्र रोग (eye disease) विशेषज्ञ प्रो. (डॉ.) पी.के. मुखर्जी ने भारत में कॉर्निया की वजह से अंधता का शिकार रोगियों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में 1.20 लाख रोगियों को कॉर्निया की आवश्यकता है। इस कमी को पूरा करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की आवश्यकता है। उन्होंने नेत्रदान में आने वाली चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कॉर्निया प्रत्यारोपण की सुविधा सभी को उपलब्ध कराने पर जोर दिया।

25 से 30 हजार बढ़ रही रोगियों की संख्या

विभागाध्यक्ष डॉ. सोमेन मिश्रा ने बताया कि भारत में प्रतिवर्ष कॉर्निया की वजह से अंधता का शिकार होने वाले रोगियों की संख्या 25 से 30 हजार तक बढ़ जाती है। जबकि इस अनुपात में लोग नेत्रदान के लिए आगे नहीं आते हैं। उन्होंने मृत्यु उपरांत स्वस्थ नेत्र के दान देने का आह्वान करते हुए इसमें नेत्र बैंक के योगदान को महत्वपूर्ण बताया। डॉ. अंकुर श्रीवास्तव ने नेत्रदान के संबंध में भ्रांतियों को दूर करते हुए कहा कि यह प्रक्रिया शव रखे हुए स्थान पर ही 15 से 20 मिनट में पूरी की जा सकती है। इसके लिए बस संबंधित चिकित्सकों को सूचना देने की आवश्यकता होती है।

डॉ. विजया साहू ने आई बैंक के इतिहास पर, डॉ. नीता मिश्रा ने नेत्रदान के सामाजिक पहलुओं और डॉ. लुबना खान ने नेत्रदान की सर्जरी के विषय में विस्तार से बताया। विभाग द्वारा विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर नेत्र रोगियों (eye disease) को कॉर्निया संबंधी बीमारी के बारे में जागरूक बनाया गया। इस अवसर पर पोस्टर भी प्रदर्शित किए गए।

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