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ऐसा जज्बा और कहां: खुद 8 माह की गर्भवती, नक्सल इलाके में ले रही हैं कोरोना से लोहा

रायपुर. छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित कोंडागांव जिले के केरावाही गाँव के हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में तैनात हैं छत्तीसगढ़ की बेटी संतोषी मानिकपुरी.. लेकिन छत्तीसगढ़ महतारी के इस बेटी के अंदर देशभक्ति का जज्बा ऐसा है कि आठ माह की गर्भवती होने के बाद भी कोरोना के खिलाफ जंग में पूरे देश के साथ खड़ी है।

आज हम और आप अपने घरों में बैठकर कोरोना संकट काल के समाप्त होने की बाट जोह रहे हैं। वहीं एक ऐसी भी शख्सियत छत्तीसगढ़ के नक्सल इलाके में मौजूद हैं जो सरकारी तौर पर छुट्‌टी के लिए अधिकृत है लेकिन वह महज इसलिए अवकाश नहीं ले रही है ताकि लोगों की सेवा कर सके। 38 वर्षीय संतोषी मानिकपुरी को उनके बेहतर कामकाज के लिए पिछले महीने कोंडागांव जिला प्रशासन ने “चैंपियन ऑफ चेंज का खिताब” दिया था।

वे सहायक नर्स मिडवाइफ (एएनएम) हैं। चूंकि वह बहुत गर्भवती है, तो काम से छुट्टी ले केकर, घर पर आराम करने के बजाय, उसने COVID -19 के खिलाफ चुनौतीपूर्ण लड़ाई में अपने साथियों के साथ शामिल होने का विकल्प चुना। वह कहती है कि “जीवन में बहुत कम उदाहरण हैं जहां आपको महत्वपूर्ण समय पर लोगों की सेवा करने का अवसर मिलता है। मैं छुट्टी ले सकती थी पर मैंने अपनी आत्मा की पुकार सुनी कि मुझे स्वास्थ्य कार्यकर्ता के रूप में अपना कर्तव्य पूरा करना चाहिए।

अगले महीने होनी है डिलीवरी

अगले महीने संतोषी की डिलीवरी होने वाली है। वे कहती है कि सीनियर एएनएम होने के नाते, यह मेरी जिम्मेदारी है कि मैं ड्यूटी पर तैनात रहूं। अधिकारियों ने मुझे जरूरत पड़ने पर छुट्टी लेने के लिए कहा था, लेकिन मैं तब तक काम करना चाहती हूं, जब तक कर सकती हूँ। उन्होंने कहा, “हम अपने क्षेत्र में स्थिति की लगातार निगरानी कर रहे हैं और लोगों से कहा है कि कोई भी व्यक्ति अन्य राज्यों या विदेश से आता है तो हमे सूचित करे.”

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