E-court,

प्रदेश में 1 अक्टूबर से राजस्व के मामलों की सुनाई होगी ई-कोर्ट में

सीएम भूपेश बघेल ने जारी किया निर्देश

रायपुर. प्रदेश का शासकीय खजाना भर सके इसलिए राजस्व के लंबित मामलों को एक अक्टूबर से ऑनलाइन निराकरण किया जाएगा। राज्य में राजस्व के मामलों के पंजीयन से लेकर उनके निराकरण तक की स्थिति में तत्तपरता एवं पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से आगामी एक अक्टूबर से राजस्व ई-कोर्ट प्रणाली (E-court) अनिवार्य रूप से लागू की जाएगी। सीएम भूपेश बघेल ने इस संबंध में सभी कलेक्टरों को आज वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। राज्य में एक अक्टूबर 2020 से राज्य में ई कोर्ट के दस्तावेज ही मान्य होंगे।

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लोक सेवा गारंटी अधिनियम के दायरे में मामलें

मुख्यमंत्री (E-court) ने कहा कि 7500 वर्ग फीट तक की नजूल भूमि के आबंटन तथा 5000 वर्ग फीट तक के डायवर्सन के मामलों को लोक सेवा गारंटी अधिनियम के दायरे में शामिल किया जा रहा है। उन्होंने राजीव गांधी आश्रय योजना के तहत शहरी इलाकों में पट्टा वितरण की स्थिति की समीक्षा करते हुए कलेक्टरों को पात्र हितग्राहियों को अभियान संचालित कर भू-स्वामी अधिकार दिए जाने की कार्रवाई के निर्देश दिए।

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छात्रावासों को बनाया मॉडल

सीएम (E-court) ने प्रत्येक जिले में दस-दस छात्रावासों को मॉडल बनाने के संबंध में कलेक्टरों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव श्री आर पी. मंडल ने कहा कि चिन्हांकित छात्रावासों में स्वच्छ पेयजल और शौचालय एवं खेल-मैदान सहित अन्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रत्येक जिले को 25-25 लाख रूपए का आबंटन दिया गया है।

सीएम ने कलेक्टरों को इस कार्य को प्राथमिकता से पूर्ण कराने के निर्देश दिए। आवश्यकतानुसार सीएसआर एवं डीएमएफ फंड से भी छात्रावासों की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक राशि का उपयोग किया जा सकेगा। कलेक्टरों को कहा गया कि सभी आश्रमों एवं छात्रावासों में लगने वाली  दैनिक उपयोग की सामग्री की पूर्ति स्थानीय स्व-सहायता समूहों के माध्यम करें। बैठक में जिलों के विभिन्न विभागों के कंडम वाहनों एवं अन्य सामग्रियों की नीलामी, बोध घाट सिंचाई परियोजना के सर्वेक्षण, शासकीय भवनों में रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की स्थापना के संबंध में भी कलेक्टरों को दिशा निर्देश दिए गए।

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