Deepak Vohra,

चाइना के खिलाफ भारत के पास है 130 करोड़ सेना :वोहरा

हमारे युवाओं का दिमाग फिर गया तो पछताएगा चाइना

भिलाई . लोग अक्सर ही सवाल करते हैं। भारत चाइना का मुकाबला कैसे करेगा? हमारे पास सिर्फ 15 लाख की सेना है, जबकि उसके पास दोगुनी। जवाब सिम्पल है…। हमारा देश  बूढ़ों का नहीं, बल्कि जवानों का देश है। हमारी 75 फीसदी के करीब यंग माइंड है, जो चीन को मजा चखाने से पीछे नहीं हटेंगे। पहले ही हमारे युवाओं का जोश उबाल मार रहा है। ऐसे में डरने की जरूरत तो चाइना को है।

ये शानदार बातें भारत के लिए विभिन्न देशों में राजदूत रहे व भारत सरकार के विशेष सलाहकार दीपक वोहरा (Deepak Vohra) ने कहीं। एम्बेस्डर वोहरा छत्तीसगढ़  के विद्यार्थियों और फैकल्टी के साथ रूबरू हुए। बुधवार को संतोष रूंगटा इंजीनियरिंग कॉलेज (आर-१) में ‘मेगाटे्रंड्स फॉर मेगाचेंजेंस’ विषय पर एक वेबीनार हुआ, जिसमें राजदूत वोहरा बतौर मुख्य वक्ता शामिल हुए और विद्यार्थियों में जोश भरा। वेबीनार का संचालन रूंगटा समूह के एक्जीक्यूटिव डायरेटर डॉ. जवाहर सूरीशेट्टी ने किया। डायरेक्टर टेक्निकल डॉ. सौरभ रूंगटा भी मौजूद रहे। 

जंग जिताएंगे हमारे यंग माइंड्स

एम्बेस्डर वोहरा (Deepak Vohra) ने विद्यार्थियों को सीख दी कि मनौवैज्ञानिक तौर पर हम सभी को ताकतवार बनना होगा। चाइना भले ही खुद को सुपर दिखाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन सच तो ये है कि उसे युद्ध का कोई अनुभव नहीं। 41साल पहले सिर्फ  उसने वियतनाम पर हमला किया था। उसके बाद से कभी भी लड़ाई के मैदान में नहीं उतरा। इसके विपरित हमारे जवानों को युद्ध में महारत हासिल है। चाइना सिर्फ मनौवैज्ञानिक तौर पर हमें कमजोर करके जंग जीतना चाहता है। उसे इस मंसूबे में हमारे यंग माइंड्स कभी कामयाब नहीं होने देंगे। बाकी का हिसाब हमारी सेना पूरा कर लेगी। 

जब गोरे हुए आग बबुला 

एम्बेस्डर वोहरा (Deepak Vohra ने आगे कहा, मुझे आज भी वह पल याद है जब पिस्सु से देश डेनमॉर्क, फिनलैंड, नॉर्वे हमें (भारत को) आकर भाषण देते थे कि आपने न्यूक्लीयर टेस्ट क्यों किया है, मत करो। हमें कर्ज के बोझ तले दबाकर सबकुछ मनवाने की कोशिश होती थी। उस वक्त आज से 20 साल पहले भारत ने खुद को साबित करने की लड़ाई झेड़ दी थी। भारत के पूर्व राष्ट्रपति व 2003 में वित्त मंत्री रहे प्रणब मुखर्जी ने ब्रिटेन को उसकी सही जगह दिखा दी थी। पूर्व राष्ट्रपति ने कहा था, अब हमें तुम्हारी मदद नहीं चाहिए। और भी देश हैं, उनको दे दो। यह सुनकर गोरे आग बबुला हो उठे थे। आपको जानकर गर्व होगा कि उसके बाद से भारत ने कभी भी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के सामने हाथ नहीं फैलाए। 

गर्व, जब जगुआर का घमंड टूटा

एम्बेस्डर वोहरा ने आगे कहा.., जब मेरा जन्म हुआ था तब भारत में दरिर्दता 12 प्रतिशत थी। केवल 10 फीसदी लोग ही स्कूल में गए थे। जब भी समस्या होती थी हम लोग विदेशियों के पास पहुंचते थे कि हमारी मदद करो। कई साल तक दुनिया से मदद लेकर हमारी आदतें बिगड़ चुकी थीं। लेकिन 1990 के बाद भारत एक राष्ट्रीय ताकत बनकर उभरा।

एक भारतीय के तौर पर मेरे लिए प्राउड मूवमेंट वह है जब टाटा ने जगुआर को खरीदा, एयरटेल ने जेन को खरीदा। जब ये गोरे जंगलों में नंगे घूम रहे थे, तब हमारा भारत पढ़ाई की बात करता था। आज 50 हजार कॉलेज और यूनिवर्सिटी है। देश में 15लाख स्कूल हैं। हमारे 34 करोड़ स्टूडेंट्स हैं, जिसमें से आधे से जयादा बेटियां हैं। आजादी के बाद 10 फीसदी साक्षारता नहीं थी। इसलिए कहता हूं मेरा देश बदल रहा है। भारत ही एक अकेला ऐसा मुल्क है, जहां सौ करोड़ स्मार्टफोन हैं। कपड़े और खूबसूूरती पर खर्च करने में मामले में भारत दुनिया में तीसरे नंबर पर आता है।

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