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जिस प्रोफेसर को शासन ने बर्खास्त किया, उसे इस सरकारी विवि में कैसे मिल गई नौकरी

रायपुर . छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय प्रदेश का ऐसा सरकारी विश्वविद्यालय है, जिसमें कुलपति, रजिस्ट्रार और परीक्षा नियंत्रक को छोडक़र कोई भी अधिकारी और कर्मचारी पक्की नौकरी वाला नहीं है। यानी ठेका प्रथा पर चल रहे इस विवि के कर्मचारी डेली वेज पर काम करते हैं। विवि को १५ साल गुजर गए लेकिन हालात बदलने में सरकारें नाकाम रहीं। सबसे मजे की बात भी सुन लीजिए। यहां काम करने वाले कर्मचारियों में बहुतों की उम्र सीमा पार कर चुकी हैं। ७० साल के कंसलटेंट भी यहां बाबुगिरी करते मिल जाएंगे। वैसे ये सभी डेली वेज पर हैं, इसलिए इनकी उम्र से वैसे भी विवि को क्या लेना-देना। साफ लहजे में कह दें तो भैया सवा बार रिटायर हो चुका आदमी भी यहां बड़े मजे से कामकाज संभाले हुए हैं।

इन साहब पर इतनी मेहरबानी क्यों हुजुर

सीएसवीटीयू में वह प्रोफेसर भी बतौर कंसलटेंट कार्यरत है, जिसे राज्य सरकार ने फर्जी जाति प्रमाणपत्र से नौकरी करने के मामले में बर्खास्त किया। सरकारी पॉलीटेक्निक कॉलेज से २०१५ में बर्खास्त के बाद सीएसवीटीयू ने इनको नौकरी दे दी। इसके अलावा अभी दो दिनों पहले ही विवि प्रशासन से दो कंसलटेंट को हटाया गया है। इस मामले में विवि के समकुलपति डॉ. मनोज कुलश्रेष्ठ ने कहा कि कार्यों के लिए कंसलटेंट की जरूरत होती है। शासन स्तर पर इनके लिए नियुक्तियां नहीं हो पाई इसलिए कंसलटेंट की जरूरत है।

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