Corona warrier

अंबिकापुर के कैदी भी बन गए Corona warrior.. कैसे पढ़ें पूरी खबर..?

कर रहे हैं अपने सामाजिक दायित्वों का निर्वहन, जेल प्रशासन के भी मिल रहा सहयोग

अंबिकापुर. जब देश में संकट के बादल मंडराने लगते हैं तो हर कोई बढ़-चढ़कर इस संकट को उबारने को कवायद में लग जाता है। शायद यही दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की बुनियाद है। आज जब समूचा देश कोरोना वायरस को मात देने की कोशिश में लगे हैं वहीं जिले के सेंट्रल जेल के बंदी भी कोरोना वारियर (Corona warrior) की शक्ल अख्तियार कर अपने सामाजिक दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।

कभी गुनाह करने वाले ये हाथ आज कोरोना वायरस से लोगों को निजात दिलाने के लिए कपड़े की मशीन लेकर मास्क बना रहे हैं। मन में बस एक ही जज्बा है। चाहे जैसा भी हो मेरा देश इस संकट से जल्द ही जल्द उबर जाए। इस आपदा में जहां देश का हर शख्स किसी न किसी रूप में लोगों के सहयोग के लिए आगे आ रहे हैं वहीं इन हालातों में सेंट्रल जेल अंबिकापुर के बंदी भी किसी कोरोना वारियर (Corona warrior) से कम नहीं। इनके द्वारा तैयार मास्क इतने सस्ते हैं कि हर गरीब की बजट में यह मास्क आ जाएगा। महज 5 से साढ़े पांच रुपए की कीमत में बंदियों द्वारा बनाए गए इस मास्क की सप्लाई होने लगी है।

जेल में मास्क के लिए कपड़ों की कटिंग करता बंदी

13 हजार से भी ज्यादा मास्क तैयार

अंबिकापुर केन्द्रीय जेल के बंदी इन दिनों जेल में रहकर मास्क का निर्माण करने में जुटे हैं, ताकि दूसरों की जान की रक्षा हो सके। जेल में बंद इन कैदियों की सकारात्मक सोच से मास्क का उपयोग कर लोग लाभान्वित हो रहे हैं। लोगों को कोरोना वायरस संक्रमण से बचाने के लिए केन्द्रीय जेल अंबिकापुर में मास्क का निर्माण कराया जा रहा है। अब तक बंदियों द्वारा 13 हजार से ज्यादा मास्क का निर्माण बंदियों द्वारा किया गया है। साथ ही इन बंदियों को देश हित काम करने में बहुत ख़ुशी है।

मास्क की सिलाई करता अंबिकापुर जेल का बंदी

सीएमएचओ कार्यालय से भी आर्डर

केन्द्रीय जेल अधीक्षक राजेन्द्र गायकवाड़ के मुताबिक अब तक सीएमएचओ कार्यालय में 3000 का आर्डर दिया गया था जिसे कैदियों ने दिन रात मेहनत कर तैयार किया। मास्क सीएमएचओ कार्यालय को दिया गया है और लोग इसका उपयोग भी कर रहे हैं। लोगों का मानना है कि जेल में निर्मित मास्क काफी अच्छा है।

सिलाई केन्द्र तक जाते हुए बंदी

महज 5 से साढ़े पांच रुपए है कीमत

स्वयं का बना मास्क हजारों बंदी भी उपयोग कर रहे हैं। इसके अलावा जेल के कर्मचारी भी बंदियों द्वारा बनए गए मास्क का ही उपयोग कर रहे हैं। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसकी मांग देखी जा रही है 1500 रजपुरी पंचायत और 1000 मास्क लुण्ड्रा विकासखंड के ग्राम दोरना द्वारा खरीदा गया है। जेल प्रबंधन ने मास्क का दाम शासकीय कार्यालय के लिए 5 व निजी लोगों के लिए 5.50 रुपए रखा है।

बंदियों द्वारा तैयार मास्क

मेडिकल कॉलेज को देंगे 5 हजार मास्क

जेल के बंदियों द्वारा निर्मित मास्क की अच्छी मानक को देखते हुए मेडिकल कॉलेज अस्पताल द्वारा 5 हजार मास्क बनाने का ऑर्डर दिया गया है। इसे बनाने में लिए जेल के बंदी सिलाई मशीन में दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। साथ खादी का कपडा भी बंदियों द्वारा ही तैयार किया जाता है।

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