Corona epidemic affected education system

कोरोना संकट के मद्देनजर 14 के बाद यूजीसी कर रहा शिक्षा व्यवस्था में बदलाव

रायपुर. राज्य मे कोरोना महामारी Corona epidemic से न केवल आम-जनजीवन प्रभावित हुआ है बल्कि शिक्षा व्यवस्था में भी इसका खासा असर पड़ा है। सूबे में माध्यमिक शिक्षा और उच्च शिक्षा व्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। अभी तक 12वीं कक्षा के परिणामों की घोषणा नहीं हो पाई है लिहाजा, जो विद्यार्थी आईआईटी, जेईई, पीएमटी, एआई ट्रिपल ई जैसी परीक्षाएं दिलाने की तैयारी कर रहे थे उन्हें निराशा हाथ लग रही है।

लॉक डाउन और कोरोना महामारी Corona epidemic को ध्यान में रखते हुए विश्विद्यालय अनुदान आयोग यानि यूजीसी ने एक समिति गठित की है। यह समिति 14 अप्रेल के बाद कुछ विशेष बदलाव करने की तैयारी में है, जिससे विद्यार्थियों को कोई परेशानी न हों। इस बदलाव की बाट जोह रहे शिक्षा संकायों के लिए यह एक राहत भरी खबर है। जो कोरोना संकट के चलते लगभग चरमरा गई है।

इंटर्नशिप और प्लसेमेंट पर असर

इस मसले को लेकर न्यूज स्लॉट की टीम ने आइटीएम यूनिवर्सिटी के कुलसचिव नेसा मूर्ति से बात की। उनका कहना था कि कोरोना संकट से न सिर्फ़ पढ़ाई को नुकसान पहुँचा है बल्कि पढ़ाई से जुड़ी कई और प्रक्रिया जैसे ट्रेनिंग, इंटर्नशिप और प्लसेमेंट पर भी बहुत बुरा असर डाला है। आगामी सत्र में कॉलेज मे एडमिशन ले रहे छात्रों मे भी भारी गिरावट देखने को मिल सकती है, जब प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाएँ ही देर से होंगी तो छात्र दाखिला लेने से भी हिचकिचाएंगे।

प्लेसमेंट से महरूम रह गए विद्यार्थी

भारतीय प्रबंध संस्थान आईआईएम के निदेशक भारत भास्कर ने बताया की शिक्षा के क्षेत्र में समर इंटर्नशिप को स्थगित करना पड़ा और मैनेजमेंट को विद्यार्थियों को प्रोजेक्ट करने में भी खासी दिक्कतें आ रही है। हर साल मार्च माह के बाद प्री प्लेसमेंट ऑफर्स का आयोजन किया जाता रहा है लेकिन इस साल लॉक डाउन के चलते उसे टालना पड़ा।

हो डिजिटल व्यवस्था

कलिंगा यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर जनरल ब्यजु जॉन के मुताबिक ऐसे हालात में डिजिटल माध्यमों का सहारा है और तमाम शिक्षण संस्थानों को अपने विद्यार्थियों को ये सुविधा देनी चाहिए। उन्होने बताया कि नए एडमिशन की प्रक्रिया एवं काऊंसिलिंग मे विलंब की वजह से हो सकता है की आगे चलकर शनिवार एवं रविवार को भी क्लास लगाई जाए।

आकादमिक कैलेंडर सुधारने की कवायद

मैट्स यूनिवर्सिटी के कुलसचिव गोकुल पंडा के मुताबिक यदि लॉक डाउन दो महीने भी यदि खींच जाता है तो सेशन आगे बढ़ाने की नौबत आ सकती है। अंतिम वर्ष की तालीम ले रहे छात्रों को इंटर्नशिप में दिक्कतें आ सकती है। उन्होंने बताया कि यूजीसी ने इसे लेकर दो समितियां गठित की है। इसमें सभी विश्वविद्यालयों के प्रबंधकों को उम्मीद है कि विद्यार्थियों के हित में कोई फैसला लिया जाएगा। पहली समिति आकादमिक कैलेंडर सुधारने प्रयासरत है तो दूसरी कंपनी सीमित डिजिटल क्लॉसरूम से जुड़ी व्यवस्थाओं के लिए काम कर रही है।

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