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बिजली बिल 10 फीसदी महंगा करने की तैयारी में कंपनी

एक अप्रैल से बढ़ सकते हैं बिजली के दाम
टैरिफ बढ़ाने के लिए कंपनियों ने तैयारी शुरू की
नियामक आयोग ने कंपनियों के सौंपे प्रस्ताव का किया निराकरण, अब जनसुनवाई की तैयारी

रायपुर। बिजली उत्पादन में खर्च ज्यादा होने और राज्य सरकार की तरफ से उपभोक्ताओं को 400 यूनिट बिल में 50 फीसदी की छूट देने का असर आगामी दिनों में बिजली की दरों में दिखेगा।

नियामक आयोग के रिटायर्ड अफसरों की माने तो बिजली बिल में 1 अप्रैल से 10 फीसदी तक महंगा हो सकता है। नए वित्तिय वर्ष में टैरिफ बढ़ाने की तैयारी बिजली कंपनी के अधिकारियों ने शुरू कर दी है। साल भर के आय व्यय का हिसाब कर प्रस्ताव नियामक आयोग को सौंप दिया है। आयोग ने बिजली कंपनी द्वारा दिए गए प्रस्ताव पर आपत्तियों का भी निराकरण कर लिया है। अब आयोग जनसुनवाई की तैयारी कर रहा है। इस जनसुनवाई में उपभोक्ता अपनी अनापत्तियां दर्ज करा सकेंगे। उपभोक्ताओं की आपत्तियों के आधार पर नियामक आयोग 2020-21 के लिए नए दरों का निर्धारण करेगी।

8 ईकाईयों में खर्च बढ़ा है ज्यादा

विभागीय जानकारों की माने तो 2018-19 की तुलना में 19-20 में बिजली उत्पादन, वितरण, डिस्ट्रीब्यूशन समेत सभी 8 ईकाईयों में खर्च ज्यादा है। इसलिए कुल व्यय राशि पर हर साल की तरफ सिर्फ 3 प्रतिशत प्रॉफिट के साथ बिजली कंपनी ने अपना प्रस्ताव नियामक आयोग को सौंपा है। उनका यह भी कहना है कि इस बार कोयले की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। कर्मचारियों को डीए भी 5 प्रतिशत बढ़ाया गया है। इन सब कारणों की वजह से प्रति यूनिट बिजली की दरों में बढ़ोतरी तय है।

6.50 करोड़ रुपए हर महीने माफ

राज्य सरकार ने प्रदेश के 57 लाख उपभोक्ताओं में से 46 लाख घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली बिल हाफ योजना से जोड़ा है। राज्य सरकार इन उपभोक्ताओं को 400 यूनिट से कम बिजली खपत पर 50 प्रतिशत छूट देती है। किसानों को भी पंप कनेक्शनों पर बिजली रियायती दरों पर दी जा रही है। इन सब योजनाओं के तहत प्रदेशवासियों को फायदा देने से राज्य सरकार हर महीने 6.50 करोड़ अपनी जेब से दे रहा है। राज्य के 27 जिलों में हर महीने 162 और सालाना २ हजार करोड़ का अतिरिक्त व्यय राज्य सरकार पर है।

2019-20 चुनावी वर्ष इसलिए

5 फीसदी की राहत- 2019-20 वित्तीय वषज़् में विधानसभा, लोकसभा चुनाव होने थे। इसलिए बिजली की दरों में बढ़ोतरी की बजाए उपभोक्ताओं को राहत दी गई। 400 यूनिट तक बिजली खपत पर 5 प्रतिशत तक की कमी और इससे कम पर 4 से साढ़े 3 प्रतिशत की छूट दी गई थी। इसी व्यवसायिक और उद्योगिक दरों में भी बहुत

ज्यादा छेड़छाड़ नहीं किया गया था।

घरेलू उपभोक्ताओं का टैरिफ वर्तमान दर अनुमानित बढ़ोतरी के बाद 0 से 100 यूनिट तक 3.40 रु 3.70 रु. प्रति यूनिट चार्ज 101 से 200 यूनिट तक 3.60 रु 3.90 रु. प्रति यूनिट चार्ज 201 से 400 यूनिट तक 4.90 रु. 5.30 रु. प्रति यूनिट चार्ज 401 से 600 यूनिट तक 5.50 रु 5.70 रु. प्रति यूनिट चार्ज 600 से अधिक यूनिट पर 7.30 रु 7.50 रु. प्रति यूनिट चार्ज

व्यावसायिक कनेक्शन का टैरिफ 0 से 100 यूनिट तक 5.40 रु. 5.80 रु. प्रति यूनिट चार्ज, 101 से 400 यूनिट तक 6.50 रु. 6.70 रु. प्रति यूनिट चार्ज, 400 से अधिक यूनिट पर 7.90 रु. 8.20 रु. प्रति यूनिट चार्ज,थ्री फेज कनेक्शन पर 15 किलो वॉट तक, 0 से 400 यूनिट तक 6.50 रु. 6.80रु. प्रति यूनिट चार्ज, 401 से अधिक यूनिट पर 7.80 रु. 7.90 रु. प्रति यूनिट चार्ज

औद्योगिक इकाइयों का टैरिफ, 25 एचपी तक के लिए 4.75 रु. 4.90 रु. प्रति यूनिट चार्ज, 26 से 125 एचपी तक के लिए 5.50 रु 6.10 रु. प्रति यूनिट चार्ज इस साल बिजली दरें बढ़ेंगी।

नियामक आयोग के रिटायर्ड सचिव पीएन सिंह के अनुसार इस साल बिजली दरों में निश्चित रूप से बढ़ोतरी होगी। आयोग द्वारा दर निधारण में हुई त्रुटि के कारण इस वित्तीय वर्ष में कंपनी को डेढ़ हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। कोयले की दरों में भी बढ़ोतरी हुई है। अगर आयोग की जनसुनवाई में ग्राहक सटीक तर्क के साथ अपनी बात रखें तो थोड़ी राहत जरूर मिल सकती है।

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