Tree Fern Kyathales

Bailadila Hills of CG: छत्तीसगढ़ की बैलाडीला पहाड़ियों में मिला जुरासिक काल के दुर्लभ ट्री फर्न

जीव वैज्ञानि बोले बचाने के लिए हो विशेष प्रयास

रायपुर. बैलाडीला की रहस्मयी पहाड़िया छत्तीसगढ़ के साथ पूरे विश्व में विख्यात है। यहां से निकलने वाले अयस्क छत्तीसगढ़ की आर्थिक स्थिती को मजबूत करता है। प्रदेश के जीव वैज्ञानिकों को बैलाडीला (Bailadila Hills of CG) की पहाड़ियों में जुरासिक काल का प्रसिद्ध ट्री फर्न मिला है। ट्री फर्न तीन हजार साल पहले पाए जाने वाले शाकाहारी डायनासोर का प्रमुख भोजन था। छत्तीसगढ़ के जीव वैज्ञानिकों ने इस वनस्पित को संरक्षित करने की अपील राज्य सरकार से की है।

ट्री फर्न में विलुप्त होने का खतरा

बैलाडीला (Bailadila Hills of CG) की प्रसिद्धि विश्व में लौह अयस्क खदानों की वजह से है। किरंदुल-बचेली में राष्ट्रीय खनिज विकास निगम की परियोजनाएं है। जीव वैज्ञानिकों का मानना है कि इन योजनाओं की वजह से ट्री फर्न विलुप्त हो सकता है। ट्री फर्न के इलाके को लौह अयस्क की योजनाओं का संचालन नहीं होगा, तो विलुप्त होने का खतरा टल जाएगा। वैज्ञानिक इसमें रिसर्च करके इतिहास खंगाल सकेंगे।

ये वनस्पती प्रजाति हो चुकी विलुप्त

बैलाडीला (Bailadila Hills of CG) पर अध्यन कर चुके जीव विज्ञान एचकेएस गजेंद्र बताते है, कि इन पहाड़ियों में सेलाजिनेला, लाइकोपोडियम प्रजाति की वनस्पती भी थी। माइनिंग की वजह से ये पादप प्रजाति विलुप्त हो गई है। समुद्रं तल से 1260 फीट ऊंचाई पर स्थित बैलाडीला पहाड़ की जलवायु विशेष प्रकार के जीवों और प्रजातियों के लिए अनुकूल है।  

300 वर्ष में तैयार हुआ 10 फीट का पौधा

ट्री फर्न का वैज्ञानिक नाम क्याथेल्स है। यह लेप्टोसपोसेंगिएट फर्न है। ट्री फर्न में पत्ता, तना और जड़ होता है, लेकिन फूल नहीं होता है। वैज्ञानिकों की मानें तो इन्हें 8 से 10 फीट के होने पर 200 से 300 वर्ष लग जाते है। बैलाडीला में पाया गया ट्री फर्न लगभग 20 फीट का है। इसकी औसत आयु 500 वर्ष होगी।

तीन किलोमीटर का क्षेत्र संरक्षित

वन विभाग के बचेली रेंज के अफसर अशोक सोनवानी ने बताया कि बैलाडीला में ट्री फर्न के 327 पौधे है। पौधे जुरासिक काल के है, इसकी  जानकारी मिलने पर केंद्रीय पौध संरक्षण ने 3 किलोमीटर का क्षेत्र संरक्षित किया गया है। ट्री फर्न के स्थानों के पास वन विभाग नमी क्षेत्र का विकास कर रहा है।

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