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4500 करोड़ का ठेका चुनिंदा कंपनियों को, नामजद शिकायत पहुंची CM के पास

सीएम बघेल ने मुख्य सचिव मंडल की अध्यक्षता में कमेटी की गठन

रायपुर। जल जीवन मिशन योजना (JAL JIVAN MISHAN YOJNA) के अंतर्गत 4500 करोड़ का काम चुनिंदा कंपनियों को देने पर पीएचई विभाग संदेह के दायरे पर आ गया है। पीएचई प्रभारी मामलें में निश्पक्षता से टेंडर होने की बात कह रहे हे। मामला विवाद में आने के बाद सीएम भूपेश बघेल ने जांच बिठाई दी है। सीएम बघेल ने मुख्य सचिव आरपी मंडल की अध्यक्षता में कमेटी का गठन करके जांच करके रिपोर्ट जल्द से जल्द सबमिट करने का निर्देश दिया है। इस पूरे मामले पर विपक्ष ने जमकर विरोध किया है। विपक्ष ने मुद्दे पर सीएम भूपेश बघेल पर भी निशाना साधा है।

6 हजार करोड़ का काम एक ही कंपनी को

जल जीवन मिशन योजना (JAL JIVAN MISHAN YOJNA) के अंतर्गत प्रदेश में करीब 13 हजार करोड़ के ठेके हुए है। इन ठेकों में से अब तक हुए 7 हजार करोड़ के ठेके में से 6६ हजार करोड़ के ठेके एक ही कंपनी को मिले है। यह कंपनी दूसरे राज्य की बताई जा रही है। इस कंपनी ने कुछ स्थाई फर्मों के साथ मिलकर ठेके हासिल किया है। पूरे मामलें की शिकायत मिलने पर सीएम ने सचिव आरपी मंडल, एसीएस वित्त अमिताभ जैन पीएचई सचिव कोमल सिद्धार्थ परदेसी की जांच कमेटी बना दी है। राज्य बनने के बाद यह अब तक की सबसे बड़ी कमेटी है। मामलें में अब तक ठेकेदारों ने काम शुरू नहीं किया है। सीएम ने जांच कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद वर्क आर्डर जारी करने की बात कही है।

ग्रामीण इलाको में पाइप लाइन सप्लाई का है काम

जल जीवन मिशन योजना (JAL JIVAN MISHAN YOJNA) मुख्यता ग्रामीण इलाके में हर जगह पानी की सप्लाई की है। इस योजना के तहत खर्च का वहन 45 प्रतिशत केंद्र सरकार को, 45 प्रतिशत राज्य सरकार को और 10 प्रतिशत संबंधित पंचायतों को वहन करना है। यह योजना केंद्र ने इसी साल लांच की है। प्रदेश में २० हजार पंचायतों के हर घरों में इस योजना के तहत नल कनेक्शन की लाइन बिछानी है। मामलें में एक इंजीनियर की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

बाहर की 44 कंपनियों को प्रदेश में काम

मामलें में विभाग के एक इंजीनियर ने प्रदेश के बाहर की कंपनियों को फायदा दिलाने के लिए टेंडर की शर्तों को काफी लचीली कर दी। इसका फायदा उठाते हुए कई कंपनियों ने ठेके हासिल किया। ठेके हासिल करनी वाली ४४ कंपनियां बाहर की है। इतना ही कुछ को रेट कांट्रेक्ट कर काम दिया गया । इन्हें तीन चौथाई काम दिए गए। करीब 4500 करोड़ के ठेके पूरी तरह से संदेह के दायरे में है। विभाग ने पाइप निर्माता, इंजीनियरिंग और कंप्यूटर और उसकी एसेसरीज बनाने वाली अनुभवहीन कंपनियों को भी काम दे दिया गया। इससे नाराज प्रदेश के फर्मों और ठेकेदारों ने सीएम बघेल और पार्टी के अन्य नेताओं से शिकायत कर दी।

इन कंपनियों को दिया गया काम

जिन कंपनियों को काम देने की बात पर विवाद हुआ उनमें पटेल इंजीनियरिंग मुंबई, लक्ष्मी इंजीनियरिंग कोल्हापुर, गाजा इंजीनियरिंग तेलंगाना,सुधाकर इंफोटेक हैदराबाद, एनएसटीआई कंस्ट्रक्शन कंपनी हैदराबाद, पीआर प्रोजेक्ट इंफ्रोस्ट्रक्टर दिल्ली प्रमुख हैं। पीएचई में ए-श्रेणी के ठेकेदारों के लिए काम की असीमित पात्रता है, बी-श्रेणी वालों के लिए 10 करोड़, सी-श्रेणी वालों के लिए 2 करोड़ और डी-श्रेणी वालों के लिए एक करोड़ की पात्रता निर्धारित है। लेकिन शिकायतें यह की गईं कि डी-श्रेणी के ठेकेदारों को भी 4 से 10 करोड़ रुपए तक का काम दे दिया गया।

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